अंधा वाटे रेवड़ी चिन्ह चिन्ह के देए की कहावत को चरितार्थ करने वाले भ्रष्टाचारियो को नीति नियम या फिर कानून की कितनी परवाह है यह तो जिले के प्रशासनिक व्यवस्था मेें स्पस्ट नजर आता है जहा डीएमएफ फंड से पक्के निर्माण कार्य की योजना बननी चाहिए वहा पहले पुराने तालाबो का चिन्हाकन किया गया और फिर उसी मे भ्रष्टाचार की नई परत चढ़ा कर प्रदेश सरकार को ही गुमराह किया गया। आदिवासी वाहुल्य जिले के विकास को इस जिले के अधिकारियो ने चारागाह मानकर जनता पर अंग्रेजो से भी क्रूर शासन पद्धति संचालित की है। ग्रामीणो की माने तो ग्राम पंचायत मोहनी के पुराने तालाब को ही नया तालाब बताकर सरपंच सचिव और उपयंत्री संदीप मेहरा ने शासकीय राशि का बंदर बांट कर लिया है।
गौरतलब है कि जयसिंहनगर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत मोहनी में डीएमएफ खनिज प्रतिष्ठान मद से वर्ष 2025 जून में 25=00 लाख की लागत से नवीन तालाब बेरीडोल मोहनी में स्वीकृति किया गया । जिस जगह के लिए नवीन तालाब बनाने के लिए राशि स्वीकृति प्रदान की गई है। उस जगह पर वर्ष 2011_12 में तत्कालीन सरपंच कुसुम सिंह कंवर के कार्यकाल में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत उक्त तालाब को बनवाया था जिसके साक्ष्य इस तालाब के बनवाने की प्रशासकीय स्वीकृति बिल वाउचर्स कैश बुक समस्त कागजात की प्रतियां आज भी ग्राम पंचायत मोहनी में देखा जा सकता है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी से डीएमएफ तक का सफर
मोहनी के विकास गाथा को लिखने वाले भ्रष्ट सरपंच सचिव उपयंत्री की कहानी में जिस जगह के लिए नवीन तालाब बनाने के लिए राशि स्वीकृति प्रदान की गई है। उस जगह पर वर्ष 2011_12 में तत्कालीन सरपंच कुसुम सिंह कंवर के कार्यकाल में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत उक्त तालाब को बनवाया था। ऐसे में जो पुराना तालाब था उसकी बाहर से पुरानी मिट्टी आज भी दिख रही है जिसका भौतिक सत्यापन भी किया जा सकता है। जिसकी पुष्टि ग्रामीण जनों के द्वारा भी किया जा रहा कि पुराने तालाब को ही नवीन तालाब बनाकर शासन के राशि का दुरुपयोग एवं राशि का बंदरबांट किया गया है। पुराने तालाब में पिचिंग कार्य भी पूर्व सरपंच के द्वारा कराया गया था जिसका आज भी सबूत है बरसात में मेढ़ की जहां नई मिट्टी बह गई है और पिचिंग के पत्थर दिख रहे हैं।
भ्रष्टाचार का पर्याय बना संदीप मेहरा
थोड़ी बहुत नई मिट्टी डलवाकर उपयंत्री संदीप मेहरा के द्वारा माप पुस्तिका में मेजरमेंट किया गया है। जिसमें पहली किस्त के रूप में लगभग 7=50 लाख की राशि भी फर्जी बिल वाउचर्स लगाकर एजेंसी के द्वारा आहरण किया जा चुका है। जिसमे उपयंत्री संदीप मेहरा ने अपने उच्चाधिकारियो को अंधेरे में रख कर एजेंसी के साथ मिलकर बहुत बड़ा खेला कर दिया।
उपयंत्री एक कारनामे अनेक
जयसिंहनगर मे संदीप मेहरा को भ्रष्टाचार का पर्याय ऐसे ही नही माना जाता है। इस उपयंत्री की तुलना ऐसे कथित भ्रष्टाचारी के रूप में है कि ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव भी इसकी कार्यशैली से भयभीत रहते है। जानकारो की माने तो ग्राम पंचायत कतिरा अंतर्गत ग्राम खुशरवाह में स्थित चूंदी नदी के ऊपर सिद्ध बाबा मंदिर प्रांगण में जो प्राकृतिक सौंदर्यता से भरपूर है जहां दूर दूर से लोग दर्शन के लिए आते जाते है जो अत्यंत रमणीय स्थान है। इसी जगह पर सौंदर्यीकरण के लिए विधायक निधि एवं सांसद निधि तथा मनरेगा एवं पंचायत की पंद्रहवें वित्त की राशि तथा जिले की डी एम एफ खनिज प्रतिष्ठान मद से ग्राम पंचायत कतिरा में लाखों रुपए की भारी भरकम राशि से प्रशासकीय स्वीकृति स्वीकृति प्रदान की गई थी। जिसमें लीपापोती कर शासकीय राशि का दुरुपयोग अधिकारी और दलालो के बीच बंदरबांट किया गया है ।आज अगर इस कार्य का मूल्यांकन किया जाए तो मुश्किल से 20 से 25 लाख की लागत लगी होगी जिसमें श्रद्धालुओं को मंदिर में आने जाने वाले लोगों के लिए रपटा कम स्टाप डैम पूर्व से ही बना था एवं प्रवेश द्वार हाल ही में सेवानिवृत डिप्टी रेंजर अनिल मिश्रा के द्वारा बनवाया गया है। तो फिर केवल घाट और पेवर ब्लाक पर ही एजेंसी के द्वारा इतना भारी भरकम राशि खर्च कर दी गई ।
जनपद अध्यक्ष भी मांग रही न्याय
उपयंत्री के करतूतो को शिकायत के माध्यम से उजागर करने के लिए जनपद अध्यक्ष श्री मती मालती सिंह के द्वारा कलेक्टर शहडोल को लिखित रूप से शिकायत की गई थी। जिसमें आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। ग्राम पंचायत कतिरा में भी उपयंत्री संदीप मेहरा ही हैं और उक्त कार्य को भी उपयंत्री संदीप मेहरा के द्वारा ही निरीक्षण एवं माप पुस्तिका में मेजरमेंट किया गया है। और शासन के राशि का दुरुपयोग तथा बंदरबांट एजेंसी एवं उपयंत्री के बीच किया गया है। जो जन चर्चा का विषय बना हुआ है जिसका भौतिक सत्यापन अगर दूसरे एजेंसी पी डब्ल्यू डी या डब्ल्यू आर डी से कराया जाय तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
भ्रष्ट उपयंत्री को स्वतंत्रता दिवस पर किया गया सम्मानित
ऐसे भ्रष्ट उपयंत्री को स्वतंत्रता दिवस पर अभी मुख्यकार्य पालन अधिकारी जनपद पंचायत जयसिंहनगर के द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी किया गया है। यह कहां का न्याय है। अब देखना यह है कि क्वालिटी मॉनिटर 18 अगस्त को जनपद पंचायत जयसिंहनगर के प्रवास पर रहेंगे जिसमें कई पंचायतों के कार्यों को अवलोकन भी करेंगे जिसमें मोहनी ग्राम पंचायत भी जायेंगे। अब देखना यह है कि उपयंत्री संदीप मेहरा के कारनामे उजागर होंगे या फिर इस मामले को दफना दिया जाएगा। ग्रामीण जनों की मांग है कि इस मामले की जांच उच्चाधिकारियों से कराई जाए और दोषियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही की जाए। स्टेट क्वालिटी मॉनिटर के आने से ग्रामीण जनों में एक आशा कि किरण जगी है कि दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही तो आवश्यक रूप से होगी।