शहडोल , विगत दिनों मीडिया में सुर्खिया बटोरने वाले जिले को दो नाम से जाना जाने लगा है | एक तो मिनी ब्राजील और दूसरा भ्रष्टाचार अभयारन्य जहाँ पर भ्रष्टाचारी उमरिया जिले के बांधवगढ़ अभयारन्य की तर्ज पर शहडोल भ्रष्टाचार अभयारन्य में धन भक्षी एक दम खुले में प्रशासनिक सुरक्षा एवं संरक्षण में भ्रष्टाचार करते है और उन्हें बचाने, पालने, पोषने का काम प्रशासन स्वयं करता है ?? ऐसा हम नहीं कहते बल्कि पुरे नगर में चर्चा है | हाल ही में सोशल मीडिया और समाचार पत्रों में शिक्षा विभाग का पेंट घोटाला सामने आया था | आनन् फानन में १ हाई स्कूल के प्राचार्य को निलंबित किया गया , दूसरे को अभयदान दिया गया | घोटाले के मुख्य सूत्रधार को एक कारण बताओ सुचना दी गयी | इसके बाद सेटिंग भी हो गयी शहडोल निवासी इसी बात से प्रसन्न है कि आजतक , ABP न्यूज़, टीवी ९ भारतवर्ष , जी टीवी जैसे राष्ट्रीय चैनल में शहडोल जिले का नाम आया , जनप्रतिनिधि भी प्रसन्न है क्योकि अब उन्हें एक नयी पहचान मिल गयी है | नई दुनिया समाचार पत्र में भी आया कि शहडोल जिले के वायरल बिल AI जनरेटेड है | अक्सर ऐसी समस्या तब आती है जब AI का ज्ञान प्रशासन एवं जनता दोनों को नहीं होता | जीवन में कई विभाग सम्हाल चुके उम्र दराज अधिकारियो पर कोई उंगली नहीं उठा सकता, क्योकि उनके पास अनुभव होता है ?? फॉर्मेलिटी के लिए फूल सिंह मारपाची प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी को कारण बताओ सुचना भी दी थी, यह बात अलग है कि इनसे जवाब भी ले लिया गया होगा और जवाब से संतुष्टि भी मिल गयी होगी , फिर भी यह सुचना पात्र आपके दर्शनार्थ यहाँ उपलब्ध है | इसको भी AI से बनाया गया है ???

इस सूचना पत्र में लेख है कि कि आपने बिना काम हुए भुगतान पहले कर दिया है| ओर सिविल सेवा आचरण अधिनियम के विपरीत भी है | विपरीत है तो रहे हमको क्या ??हमने तो वैसे भी आपको पालने कि जिम्मेदारी पहले से उठा रखी है?? | कुछ पत्रकार मामला उठायेगे उनमे से चंद पत्रकार तो हमारी यह न्यूज़ छापेंगे ही कि वायरल बिल फर्जी एवं AI से बनाया गया है | उन्होंने यह नहीं पूंछा कि Treasury officer क्या AI से बने बिल का भुगतान करते है ??? यह बात तो प्रमाणित हो गयी है कि इस भ्रष्टाचार कि जाँच करने कि बजाय आरोपियो को बचाने का काम हो रहा है ??? सुना है कि मिनी ब्राजील के प्लेयर संयुक्त संचालक लोक शिक्षण भी बचाने के लिए मैदान में उतर गए है | और पुनः गोल करने कि तैयारी है , कोई यह नहीं पूछ रहा कि फूल सिंह मारपाची प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बिना काम कराये सुधाकर कंस्ट्रक्शन को जनवरी 25 से अब तक 65लाख का फर्जी भुगतान क्यों किया | इन कामो में क्या नियमो का पालन हुआ ??? कितने काम किये गए , कितना पैसा आया , SDM Beohari ने जाँच में लिखा कि अभी काम नहीं हुआ | बिल वायरल होने के बाद तो काम लगाया गया है ?? इन 2 स्कूल के बच्चे भाग्यशाली रहे कि बिल वायरल होने से इनमे कुछ काम तो होगा | मामला ३ साल में करोडो का है | जिनका पैसा इसी तरह खाया जा चुका है | इनकी जाँच कौन करेगा | इस समय मुझे महान विचारक श्री राम शर्मा जी गायत्री शक्तिपीठ हरिद्वार जी की पंक्तिया याद आ आरही है ” अपनी रोटी मिल बाँट कर खाए जिससे आपके सभी भाई सुखी रह सके “| संभवतः यही विचार काम कर रहा है |
लोकायुक्त से प्राप्त RTI से भी खुलासा हुआ है कि 29.04.24 को कि गयी शिकायत विरुद्ध फूल सिंह मारपाची प्रभारी DEO एवं अरविन्द पाण्डेय APC RMSA के विरूद्ध कि गयी शिकायत को दबाने में भी खूब खेला हुआ है

यह नोटशीट लोकायुक्त भोपाल की है , इनके द्वारा 1 साल तक जाँच नहीं करने पर लोकायुक्त भोपाल ने प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग , आयुक्त लोक शिक्षण , कलेक्टर को जाँच प्रतिवेदन सहित अपने कार्यालय में स्वयं दिनांक 14.05. 25 को बुलाया था | फिर पहले से शुरू जाँच -जाँच का खेला कुछ दिन कलेक्टर कार्यालय के कर्मचारियों ने भी खेला , बाद में मिनी ब्राजील के फारवर्ड खिलाडी संयुक्त संचालक लोकशिक्षण शहडोल ने जाँच प्रतिवेदन पक्ष में बनाकर गोल दाग दिया और फूल सिंह मारपाची और अरविन्द पाण्डेय की टीम जीत गयी |
मामले बहुत है हम तो आपको बता देंगे लेकिन यहाँ के नेता एवं जनता सड़क पर जब तक नहीं निकलेगी तब तक सभी धन भक्षी सुरक्षित है |
कल देंगे 2022 का एक धन भक्षण का मामला , जुड़े रहिएगा ………………………………………………….