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वनों के विकास में नियमों की धज्जिया उड़ता हुआ फ़र्ज़ी लेखपाल और उसका परिवार

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वन विकास निगम का एक ऐसा लेखापाल सम्पूर्ण विभाग में सुर्खियो में जिसके नाम पर विभागीय अधिकारी भी भयभीत है एक कर्मचारी कैसे भय और आतंक का पर्याय बन जाता है यह चर्चा का विषय है गौरतलब है कि वन विकास निगम उमरिया वनों के विकास को बढ़ाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है,किंतु यहाँ के संभागीय प्रबंधक कार्यालय की बात की जाये तो प्रोविजनल प्रमाण पत्र पर नौकरी कर रहा लेखापाल ओंकार सिंह सेंगर एवं उसका परिवार सूचना के अधिकार के तहत उन दस्तावेजों को एकत्रित कर रहा है जो धारा 81 j के अंतर्गत आती है स्पष्ट होता है की विभाग प्रमुख इनके भय में है या इनके आपत्तिजनक करतूतों में संलिप्त है यह तो जांच से स्पस्ट हो जाएगा।

स्व. ससुर के अध्यक्ष एवं भाई के जज होने का वर्चस्व वन विकास निगम उमरिया में ला रहा सैलाब 
ओंकार सिंह सेंगर के ससुर स्व. लल्लू सिंह वन विकास निगम के अध्यक्ष रह चुके है और उनके द्वारा इनकी भर्ती नियमों को सिथिल करते हुए बिना किसी विज्ञापन के कराई थी जो आज नियमों कायदों के घेरे में है ,या फिर ऐसा समझना उचित होगा की ये दफ्तर अब सेंगर का ससुराल हो चुका है और विभाग प्रमुख इनके ससुराल वाले ।सूत्रो की माने तो इनके साले साहब जिला उमरिया में विगत माह से फैमिली कोर्ट के जज है जो की इनके काले कारनामों में इनका साथ देते हुए नज़र आ रहे है जज साहब कभी विभाग के अधिकारियों के पार्टी में नज़र आते है तो कभी शासकीय वाहन का दुरुपयोग करते हुए सेंगर परिवार को लेकर यहाँ वहाँ घूमते है जिससे  सेंगर परिवार का हौसला बुलंदियों पर है ।

तो सेंगर की नौकरी कर रहे पत्नी और बेटे
सूत्रो की माने तो ओंकार सिंह सेंगर के इन काले करतूतों के दबाने के लिए पत्नी और बेटों ने विभाग में अपने पिता की कुर्सी संभाल ली है , अब ऐसा प्रतीत होता है की विभाग के आला अधिकारी भी इन पर कार्यवाही करने से परहेज करने लगे है । इस मामले मे जनचर्चाओ की सत्यता क्या है इस पर विभागीय अधिकारियो को संज्ञान लेने की आवश्यक्ता है।

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